आचार्य ज्ञान निष्ठ आर्य
प्राचार्य एवं संस्कृत व्याकरण अध्यापन
संस्कृत व्याकरणअनुशासन, संस्कृत शिक्षा, वैदिक अध्ययन और आधुनिक विषयों के समन्वय से विकसित गुरुकुलीय जीवन-पद्धति।
एक बार गुरुकुल में प्रवेश हो जाने के बाद प्रायः दश वर्ष का अध्ययन काल है। इस सुदीर्घ काल के बीच अतीव आवश्यकता होने पर (तद्यथा—अपने सहोदर भाई या बहन के विवाह प्रसंग या परिवार के निकट सम्बन्धी की मृत्यु आदि के अवसर पर ही गृह-गमन का अवकाश मिलता है। वार्षिक अवकाश देने का प्रावधान नहीं है।
आचार्यों के मार्गदर्शन में संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परम्परा का अध्ययन।
प्राचार्य एवं संस्कृत व्याकरण अध्यापन
संस्कृत व्याकरण
संस्कृत साहित्य
संस्कृत साहित्य
संस्कृत व्याकरण
संस्कृत व्याकरणस्कूल में पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण कर लेने वाले छात्रों को प्रति वर्ष मई मास के अन्तिम दिनों में होने वाले वार्षिकोत्सव पर लिखित तथा मौखिक परीक्षा लेकर, संतोषकारक परिणाम प्राप्त होने पर गुरुकुल में प्रविष्ट किया जाता है।
मुख्यरूप से संस्कृत भाषा, संस्कृत भाषा का व्याकरण, निरुक्त तथा आंशिक रूप में वेद, उपनिषद् एवं दर्शनशास्त्र के अध्यापन के साथ-साथ गणित, विज्ञान, इतिहास-भूगोल तथा अंग्रेजी भाषा आदि विषय पढ़ाये जाते हैं। साथ ही कम्प्यूटर की भी शिक्षा दी जाती है।
विद्यार्थियों के लिए शुल्क संबंधी विवरण
पूरा वार्षिक शुल्क
अध्ययन को प्रोत्साहित करने हेतु 75% शुल्क
अध्ययन को प्रोत्साहित करने हेतु 50% शुल्क
जो छात्र शास्त्री कक्षा तक पूर्ण अध्ययन नहीं करता है और बीच की कक्षाओं से गुरुकुल छोड़कर जाता है, उससे शुल्क पूरा लिया जाता है।
अनुशासन, अध्ययन, व्यायाम, यज्ञ एवं आत्मनिरीक्षण से युक्त दैनिक जीवन।